श्लोक पाँच Verse 5

पदच्छेद:

धृष्टकेतुः, चेकितानः, काशिराजः, च, वीर्यवान्,
पुरुजित्, कुन्तिभोजः, च, शैब्यः, च, नरपुङ्गवः।।5।।

धृष्टकेतुः (धृष्टकेतु, शिशुपाल का पुत्र था और चेदी देश क राजा), चेकितानः (राजा धृष्टकेतु का पुत्र और केकय देश का राजकुमार)  , काशिराजः( प्राचीन समय में काशी1पर शासन करने वाले शासक को 'काशीराज' कहा जाता था ), च, वीर्यवान् (बलवान, काशिराज के लिए कहा गया है),


पुरुजित् (कुंतिभोज का पुत्र, पाण्डवों की माता कुंती का भाई, अर्जुन का मामा), कुन्तिभोजः( पाण्डवों की माता कुंती के पालक पिता ), च (और), शैब्यः (शिबि राजा का पुत्र, काशिराज का पुत्र), च, नरपुङ्गवः (नरों में श्रेष्ट)।।5।। 






‘काशी’
  • पौराणिक 16 महाजनपदों में से एक। वाराणसी का दूसरा नाम ‘काशी’ प्राचीन काल में एक जनपद के रूप में प्रख्यात था और वाराणसी उसकी राजधानी थी।
  • इसकी पुष्टि पाँचवीं शताब्दी में भारत आने वाले चीनी यात्री फ़ाह्यान के यात्रा विवरण से भी होती है।
  • हरिवंशपुराण में उल्लेख आया है कि ‘काशी’ को बसाने वाले पुरुरवा के वंशज राजा ‘काश’ थे। अत: उनके वंशज ‘काशि’ कहलाए।संभव है इसके आधार पर ही इस जनपद का नाम ‘काशी’ पड़ा हो
'कुंतिभोज' 
  • पाण्डवों की माता कुंती के पालक पिता थे। कुंती के पिता राजा शूरसेन ने अपनी कन्या 'पृथा' (कुंती) को दान स्वरूप कुंतीभोज को सौंप दिया था, इसीलिए पृथा को 'कुंती' कहा गया।
  • कुंतीभोज के पिता का नाम 'भीम' था और इनके दो पुत्र 'धृष्ट' तथा 'अनाधृष्ट' हुए थे।
  • कुंती के वास्तविक पिता शूर की भाँति कुंतिभोज भी यदुवंशी थे।